एक्सपर्ट्स का कहना है कि खाड़ी देश जंग में सीधे शामिल होने को लेकर असमंजस में हैं. अगर लगातार हमले होते रहे तो क्या ये देश अपना रुख़ बदल भी सकते हैं?